एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Tuesday, June 3, 2008
धीरेश का जिद्दी राग
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परसों धीरेश से मुलाकात हुई। दफ्तर आया था। अपनी बीमारी को आधे से ज्यादा परास्त कर चुका है वह। चेहरे पर थकान तो थी, पर पहले के मुकाबले बेहद कम...
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Monday, April 14, 2008
मनमोहन की एक अधूरी टिपण्णी (नवजागरण के नायक)
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यह एक विलक्षण लेकिन बड़ा ही अर्थपूर्ण ऐतिहासिक संयोग है कि १२ अप्रैल को सफदर के जन्मदिन (नुक्कड़ नाटक दिवस) के साथ ११ अप्रैल को ज्योति बा फु...
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अम्बेडकर जयंती पर
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भीमराव अम्बेडकर के विचार - हिंदू धर्म में रहकर जातिप्रथा समाप्त करने का प्रयास मीठे जहर को चाटने के समान होगा। - हिन्दूवाद आजादी, बरा...
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Saturday, April 12, 2008
नेपाल में सुर्ख सवेरा
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यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से खल्क न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई यूँ ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग में फूल न उनकी हार नई है, न अपनी जी...
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Thursday, April 10, 2008
Who Would Wipe Professor Sanaullah Radoo's Tears ?
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Professor Sanaullah Radoo, Principal of a Degree College in Sopore, Jammu-Kashmir still remembers the day when his youngest son Pervez had r...
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Wednesday, April 2, 2008
सिमोन द बउआर से पहले स्त्री विमर्श का भारतीय मुहावरा महादेवी वर्मा की कलम से निकला था
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महादेवी वर्मा को अध्यापकों-आलोचकों की बदौलत पीडा, वेदना, आंसुओं की, विरह की कवयित्री कहा जाता रहा है. `नीर भरी दुःख की बदली' का जिक्...
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ये कैसा समर्थन
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अपरिहार्य कारण से कई दिन ब्लॉग पर गैरहाजिर रहा। ये अपरिहार्य शायद अभी परेशान करे। बहरहाल एक बात मुझे परेशान कर रही है। शिवानी की हत्या के आर...
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