एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Monday, June 8, 2026
क्या अपमान से निपटने के लिए उग्रता के अलावा कोई रास्ता है?
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समीक्षा निबंध: प्रसांता चक्रवर्ती रॉक्सेन एल. यूबेन. ड्रिवेन टु देयर नीज़: ह्यूमिलिएशन इन कॉन्टेंपोरेरी पॉलिटिक्स. (प्रिंसटन और ऑक्सफ़र्...
Friday, June 5, 2026
मोहन मुक्त की कविताएँ
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कवि मोहन मुक्त मेरा पहाड़ ????? मुंडा कोल गोंड नाग बौद्ध द्रविड़ या हडप्पन बाद के जो कोई भी थे मेरे पुरखे उन्होंने कभी नहीं कहा ....'मेरा ...
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Thursday, May 21, 2026
`किसी अनजान ढाणी` से एक खरी-बेचैन आवाज़
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`बौने प्रहसन और अन्य कविताएं` कविता संग्रह प्रकाशक - न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ``एक आवाज़ आई ये देश महान है मैंने ग़ौर से देखा तो सदियों से रक्त...
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Saturday, January 17, 2026
शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़ खुलता कवि
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अदनान कफ़ील दरवेश की कविता पर शिवप्रसाद जोशी अदनान , शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़ खुलता है - उसकी यह काव्य-पंक्ति उसका परिचय है। अप...
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