एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

Monday, November 10, 2008

विष्णु नागर की एक पुरानी कविता

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मेरे भाई ने लिखी चिट्ठी लिखा आना आना कि इस बार बहन भी आ रही है आना तो ख़ूब मज़ा रहेगा गांव से भाई कहे आना तो मैं क्यों न जाऊं? मैं आऊंगा भाई...
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Saturday, November 8, 2008

आबिद आलमी की दो गज़लें

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आबिद आलमी यानी रामनाथ चसवाल. ४ जून १९३३ को रावलपिंडी की गूज़रखान तहसील के ददवाल गाँव में पैदा हुए और १९४७ में हरियाणा (तब पंजाब का ही हिस्सा...
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Monday, November 3, 2008

`ख़ामोशी ही से निकले है जो बात चाहिए`

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मनमोहन की कविता और उसका मिज़ाज - असद ज़ैदी --------------------------- एक कवि और कवि-चिन्तक के रूप में मनमोहन काफी समय से मशहूर हैं ; उनकी ...
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Sunday, October 26, 2008

सड़ांध मार रहे हैं तालाब

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तहलका कांड के खुलासे के बाद कई लोग हैरत जैसा भाव दिखा रहे थे और बीजेपी व संघ खानदान की बोलती कई दिनों तक बंद थी। हालांकि जो हैरत दिखा रहे थे...
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Tuesday, October 14, 2008

मनमोहन की दो पुरानी कविताएं

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कवि-लड़का (मनमोहन का मथुरा के छात्र दिनों का फोटो) मनमोहन हमारे समय के बड़े कवि हैं, 80 के दशक की कविता का शिल्प तय करने वाले प्रमुख क...
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Tuesday, September 30, 2008

इस वक़्त मेरे पास आपकी दिलजोई के लिए कोई नाजुक कविता नहीं है

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साहित्य में मेरी रूचि है और मैं कोई प्यारी सी कविता या कोई कविता सा गद्य का टुकडा पोस्ट करने का मन बनाता हूँ पर ऐसा हो नहीं पाता. आज सुबह द ...
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Tuesday, September 23, 2008

हमारे प्यारे आतंकवादी!

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आतंकवादी दो तरह के होते हैं. एक वो जो मुसलमान होते हैं. (कहा तो यह भी जाता है कि मुसलमान होते ही आतंकवादी हैं) दूसरे वो जो हमारे अजीज हैं, ...
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धीरेश सैनी Dhiresh Saini
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