एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

Sunday, August 30, 2009

साहित्य, सत्ता और सम्मान : प्रणय कृष्ण

›
जनांदोलनों और मानवाधिकारों पर क्रूर दमन ढानेवाली छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा १० व ११ जुलाई को प्रायोजित 'प्रमोद वर्मा स्मृति सम्मान" कार...
5 comments:
Wednesday, August 19, 2009

प्रभाष जोशी! शर्म तुमको मगर नहीं आती

›
बड़ा हल्ला रहता आया है कि प्रभाष जोशी पत्रकारिता के शीर्ष पुरुष हैं. उनके शीर्ष पुरुषवादी विचार हमेशा ही सामने आते रहे हैं, यह बात अलग है कि...
32 comments:
Monday, August 17, 2009

आज़ादी की छाँव में : बेगम अनीस किदवई

›
फिर सितम्बर आ गया। हिन्दुस्तान को आज़ाद हुए अभी पन्द्रह दिन न बीते थे कि दिल्ली में मार-धाड़ शुरू हो गई। मकानों, दुकानों और गली-कूचों ...
1 comment:
Thursday, August 13, 2009

हबीब तनवीर और सतनामी समुदाय

›
साथियो, वाणी प्रकाशन से प्रकाशित 'चरनदास चोर, २००४ संस्करण की हबीब तनवीर द्वारा लिखित भूमिका का एक अंश भेज रहा हूं, ताकि पाठक खुद निर्णय...
3 comments:
Wednesday, August 12, 2009

कृष्णमोहन - यशस्वी भव!

›
हिंदी साहित्य में इधर कई अप्रिय प्रसंग हुए हैं. उदयप्रकाश जैसे प्रतिभाशाली वरिष्ठ लेखक का एक फासीवादी से पुरस्कार लेने पहुंचना और फिर इस मुद...
12 comments:
Monday, August 10, 2009

क्या हबीब आएंगे यह लड़ाई लड़ने?

›
दो महीने हुए जब हबीब तनवीर रुखसत हुए तो उनके बारे में काफी-कुछ लिखा गया था. लेकिन इस बात का ज़िक्र कम ही किया गया कि वे कला की दुनिया में प्र...
10 comments:
Sunday, August 2, 2009

यह सांस्कृतिक सलवा-जुडूम है

›
आशुतोष कुमार अशोक वाजपेयी ने लिखा है ('कभी-कभार', 19 जुलाई, 2009, जनसत्ता ) कि कुछ लेखकों ने 'प्रमोद वर्मा स्मृति सम्मान समारोह...
9 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
Ek ziddi dhun
धीरेश सैनी Dhiresh Saini
View my complete profile
Powered by Blogger.