एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Sunday, January 31, 2010
`मार्क्स - जीवन और विचार`
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दिल्ली में किताबों का मेला शुरू हो गया है। इसके कोर्पोरेटीकरण के बाद इसमें बिना पैसे वाले किताब के आशिकों का घुस पाना मुश्किल हो गया है, फिर...
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Saturday, January 30, 2010
छोट बड़ो सब सम बसैं, हो रैदास प्रसन्न
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जात पात के फेर में, उरझत हैं सब लोग! मानवता को खात है, रैदास जात का रोग!! ..... जात पात में जात है, ज्यों केलन में पात रैदास न माणुस जुड़...
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Thursday, January 28, 2010
साहित्य अकादमी, सैमसंग की खैरात और साहित्यकार
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इस देश की जनता के स्वाभिमान को नष्ट करने के नए नए कीर्तिमान बनाने वाली यूपीए सरकार ने फिर एक नया कारनामा किया। उसकी संस्कृति मंत्रालय ने बहु...
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Tuesday, January 26, 2010
सेक्युलर रिपब्लिक और उसकी चुनौतियाँ : सुभाष गाताड़े
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इस ` सेक्युलर रिपब्लिक ` में साम्प्रदायिकता से लड़ने की चुनौती बहुत बड़ी है । उस समय ( १९४७ में ) बंटवारा हुआ , कत्लेआम हुआ पर फि...
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Thursday, January 21, 2010
आईपीएल का संघीकरण?
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इंडियन प्रीमियर लीग से पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अलग कर दिया जाना बेहद तकलीफदेह है। पाकिस्तान टी-२० क्रिकेट का विश्व चैम्पियन है और इंडियन प्र...
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Wednesday, January 20, 2010
संघ की `संस्कृति`
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अभी- अभी दिल्ली से एक दोस्त का मेल मिला जिससे पता चला कि दिल्ली विश्वविद्यालय केम्पस में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गुंडों ने जनच...
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Sunday, January 17, 2010
यह ऐसा समय है
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भारत के मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक कुमार शाहानी पिछले सप्ताह कोची में एक सेमिनार में हिस्सा लेने आये थे। चाय के वक़्त मैंने उनसे यों ह...
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