एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Saturday, June 26, 2010
कबीर और नागार्जुन
›
बनारस से वाचस्पति जी ने फोन पर बताया कि आज बाबा नागार्जुन की जन्मशती शुरु हो रही है। बाबा से उनका आत्मीय रिश्ता रहा है. इच्छा यही थी कि वे ह...
6 comments:
Monday, June 14, 2010
कविता का कठिन रास्ता : संजय कुंदन
›
विष्णु नागर हिंदी के ऐसे विरले रचनाकार हैं जिन्होंने रोजमर्रा जीवन की एकदम मामूली दिखने वाली चीजों, प्रसंगों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया ह...
10 comments:
Tuesday, June 8, 2010
दस कविताएं : मनमोहन
›
नींद ----- दक्षिण दिशा में गया है एक नीला घोड़ा बहुत घने मुलायम अयाल हैं और आँखें हैं गहरी काली और सजल नंगी है उसकी पीठ पर्वतों स...
17 comments:
Monday, May 24, 2010
इतिहास का अंत
›
इतिहास की प्रवृत्ति है अपने को दुहराना , यह मार्क्स की प्रसिद्ध उक्ति है; इतिहास के अंत की घोषणाओं के बारे में ही यह बात सबसे ज़्यादा ख...
10 comments:
Wednesday, May 12, 2010
लौट आ, ओ धार!
›
लौट आ, ओ धार! टूट मत ओ साँझ के पत्थर हृदय पर। (मैं समय की एक लंबी आह! मौन लंबी आह!) लौट आ, ओ फूल की पंखडी! फिर फूल में लग जा। चूमता है ...
10 comments:
Saturday, May 8, 2010
कसाब के बहाने उन्माद का जश्न
›
अदालत ने कसाब को फांसी की सजा सुना दी है। दुनिया ने भारतीय न्याय प्रक्रिया में मुल्क की डेमोक्रेसी को देखा जो मुल्क के बाहरी और भीतरी दुश्मन...
9 comments:
Thursday, April 22, 2010
नरेन्द्र जैन की तीन कविताएँ
›
(उनके नए संग्रह काला सफ़ेद में प्रविष्ट होता है से साभार) भाई ----- दिवंगत बड़े भाई के लिए जहाँ तक छायाचित्र संबंधी समानता का प्रश्न है ब...
4 comments:
‹
›
Home
View web version