एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Thursday, September 30, 2010
ये तो होना ही था
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`कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती`
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Tuesday, September 28, 2010
कौन सी कविताएं - नरेश सक्सेना
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जैसे चिड़ियों की उड़ान में शामिल होते हैं पेड़ क्या मुसीबत में कविताएं होंगी हमारे साथ जैसे युद्ध में काम आए सैनिक के शस्त्रों और वर्दी के साथ...
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Friday, September 17, 2010
नामवर सिंह के भक्त और लोकसमाज के लोकसेवक -जगदीश्वर चतुर्वेदी
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हिन्दी में अनेक आलोचक हैं जो अभी भी चेतना की आदिम अवस्था में जी रहे हैं. कुछ ऐसे हैं जो सचेत रूप से आदिम होने की चेष्टा कर रहे हैं। समाज जित...
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Wednesday, September 15, 2010
दूसरा नैनीताल फिल्म फेस्टिवल
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२४ से २६ सितम्बर, २०१० शैले हाल, नैनीताल क्लब, मल्लीताल, नैनीताल, उत्तराखंड. (गिर्दा और निर्मल पांडे की याद में) ...
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Saturday, September 11, 2010
नूर ज़हीर से एक मुलाकात : दहलीज़ के सफ़र की विचारोत्तेजक शुरुआत
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नूर ज़हीर से एक मुलाकात : दहलीज़ के सफ़र की विचारोत्तेजक शुरुआत --रोहित कौशिक मौसम बहुत नास्टेल्जिक था. सुबह से हो रही बारिश थम चुकी थी.रव...
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Wednesday, August 18, 2010
तब इतना करना!
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जब मैं न रहूँ इस अस्तित्व शून्यता में तब इतना करना बेहिचक तुम पोंछ लेना अपनी आँखें ठीक ही है, चार दिन- धड़केगा कलेजा, दम घुटने लग...
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Monday, August 9, 2010
विभूति नारायण राय की टिप्पणी पर प्रो. इलिना सेन
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इस बात से मुझे गहरा दुख पहुँचा है कि हमारे कुलपति श्री विभूति नारायण राय महिला लेखकों और महिलावादी विमर्श पर की गई अपनी टिप्पणी को लेकर अश...
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