एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Wednesday, May 16, 2012
कार्टून विवादः एक मानवीय अवलोकन : लाल्टू
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भारतीय समाज दलित और गैर - दलित दो तबकों में बँटा है। एक इंसान को औरों से अलग कर देखना मानव मूल्यों की दृष्टि से ग़लत है। पर सामाजिक गतिकी...
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Wednesday, May 9, 2012
याकोब का मुर्ग़ा
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( अपने समय के विख्यात चेक बाल कथा लेखक मिलोश मात्सोउरेक (1926-2002) की ' प्राणिशास्त्र ' नाम की बाल कथा सीरीज़ से कुछ कहानियों का...
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Wednesday, April 18, 2012
सेंडी याने संदीप राम - अच्युतानंद मिश्र
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उदासी वहाँ दबे पांव रोज आती देर रात शराब की मद्धिम रौशनी में वे उसे खाली ग्लास की तरह लुढ़का देते और फफक पड़ते उनकी सुबहें दोपहर के मुहाने प...
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Tuesday, April 10, 2012
नरेन्द्र जैन की कविताएं और असद ज़ैदी की टिपण्णी
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वरिष्ठ कवि नरेन्द्र जैन के नए कविता संग्रह `चौराहे पर लोहार` (आधार प्रकाशन) से कुछ कविताएं चौराहे पर लोहार विदिशा का लोहाबाज़ार जहाँ से शुरू...
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