एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Monday, July 23, 2012
पहाड़ों का विनाश और लीलाधर बुद्धिजीवियों की जुगाड़ी कलाबाजी
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समाचार-संदर्भ : हिमालयः बसेगा तो बचेगा Author: चारु तिवारी (समयांतर) Edition : July 2012 उत्तराखंड के पहाड़ों से इन दिनों खतरन...
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Friday, June 15, 2012
गुलों और दिलों में रंग भरकर चले गए मेहदी.....-शिवप्रसाद जोशी
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भारत पाकिस्तान के बीच सियाचिन से सेनाएं लौटाने के स्थूल कूटनीतिक क़िस्म के प्रस्तावों और बातचीत की पेशकशों के बीच दोनों देशों के रिश्...
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Sunday, June 10, 2012
हुसेन की पहली पुण्यतिथि और शर्मिंदगी गहरी -शिवप्रसाद जोशी
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मक़बूल फ़िदा हुसेन को गुज़रे एक साल हुआ. कल्पना करें कि याद में एक खुली प्रदर्शनी लगाई है और हुड़दंगियों की धमकी भी आ गई है. वे कह...
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Saturday, June 2, 2012
कार्टून विवाद और एक कट्टरपंथी दलित के मन की हलचल : अनूप कुमार
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“मेरा दिमाग खुला है पर खाली नहीं. खुले दिमाग वाला आदमी हमेशा ही स्वागत योग्य होता है. पर जब मै ऐसा कह रहा हूँ वहाँ आपको यह भी समझना होगा...
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Wednesday, May 16, 2012
कार्टून विवादः एक मानवीय अवलोकन : लाल्टू
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भारतीय समाज दलित और गैर - दलित दो तबकों में बँटा है। एक इंसान को औरों से अलग कर देखना मानव मूल्यों की दृष्टि से ग़लत है। पर सामाजिक गतिकी...
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Wednesday, May 9, 2012
याकोब का मुर्ग़ा
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( अपने समय के विख्यात चेक बाल कथा लेखक मिलोश मात्सोउरेक (1926-2002) की ' प्राणिशास्त्र ' नाम की बाल कथा सीरीज़ से कुछ कहानियों का...
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