एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Saturday, January 26, 2013
द इंडियन आइडियोलॉजी : बदनसीब मुल्क़ के बदग़ुमान रहनुमा
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पेरी एंडरसन की किताब `द इंडियन आइडियोलॉजी` का टुकड़ा - 1945 तक गांधी का युग ख़त्म हो कर नेहरू का ज़माना शुरू हो गया था. दोनों के बी...
Monday, January 21, 2013
शमशेर : कुछ निजी नोट्स - शुभा (अंतिम किस्त)
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(पिछली दो कड़ियों से जारी) शमशेर की कविता में गहरी आत्मीयता है। इस आत्मीयता के कारण उनके यहां प्रेम के अछूते चित्र और उमंग भरी कल्पना ...
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Thursday, January 17, 2013
शमशेर : कुछ निजी नोट्स - शुभा (दूसरी किस्त)
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(पिछली पोस्ट से जारी) 2 शमशेर अपने ढंग के मार्क्सवादी हैं। वे धर्म को बाई-पास नहीं करते। ख़ास तौर से इसलिए कि साम्प्रदायिक दंगे, ...
Monday, January 14, 2013
शमशेरः कुछ निजी नोट्स - शुभा
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शमशेर के बारे में हिंदी जगत में जैसे एक रूढ़ि बन गई है कि वे बड़े मुश्किल कवि हैं या वे रूपवादी हैं या वे मार्क्सवादी हैं, या वे प्रयोगव...
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Monday, January 7, 2013
प्रलाप : लाल्टू
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शब्द मिले अनंत तो क्यों प्रलापमय नहीं उल्लास नहीं यह ब्रह्मांड, जो हो रहा प्रसार चीखें हैं, है दुःख ही अनिवार अपरंपार है, अवश्य है क...
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Tuesday, January 1, 2013
स्त्री आजाद होती तो पुरुष भी और ज्यादा आजाद नहीं होता?- सुषमा नैथानी
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स्वतंत्र होना, गुलाम होना,ये एक व्यक्ति तय नही करता, वरन ये किसी एक समाज के परिपेक्ष्य मे ही व्यक्ति के सन्दर्भ मे कहा जा सकता है। निजी ...
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