एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Friday, January 2, 2015
बहुसंख्यकवाद, मास मीडिया और मारवा अमीर ख़ान का : शिवप्रसाद जोशी
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सही तो है.. अमीर ख़ान ने जो गाया. जग बावरा. जग बावरा ही तो है. वरना ऐसी मूर्खताएं कहां नज़र आती. ऐसी हिंसाएं. ऐसा कपट ऐसी बेईमान...
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Tuesday, December 23, 2014
ज्योत्सना शर्मा की दो कविताएं
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ज्योत्स्ना शर्मा (11 मार्च 1965-23 दिसंबर 2008) अपनी कुछ कविताओं के प्रकाशन के बावजूद हिंदी साहित्य की दुनिया में अनजाना नाम है। अनजाना की ...
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Sunday, October 5, 2014
रामचंद्र गुहा की प्रॉब्लम क्या है?
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रामचंद्र गुहा के बेसिक्स में ही कोई प्रॉब्लम है या एक सधी हुई चतुरता। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत के नागपुर भाषण को दूरदर्शन पर लाइव ...
Sunday, September 28, 2014
14 साल जेल में रहे आमिर की आपबीती
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मेरे पूर्वजों ने इस ज़मीन को, एक धर्म-निरपेक्ष देश को चुना, गांधी को अपनाया, और जिस मिट्टी में वे पैदा हुए उसी में हम दम तोड़ेंगे। ये शब्द ...
Saturday, September 6, 2014
शुभा की चार कविताएं
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वरिष्ठ कवयित्री, लेखिका और एक्टिविस्ट शुभा का आज जन्मदिन है। इस मौके पर हम अपनी 60 साल की इस युवा साथी की चार कविताएं प्रकाशित कर रहे है...
Wednesday, April 16, 2014
अमेरिका है साम्प्रदायिक-जनविरोधी ताकतों का संरक्षक : कमाल लोहानी
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(बांग्लादेश के वरिष्ठ पत्रकार और मशहूर संस्कृतिकर्मी कमाल लोहानी वहां के प्रसिद्ध भाषा आंदोलन और मुक्ति संग्राम के बड़े नामों में से ह...
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Saturday, April 5, 2014
माणिक सरकार को आप कितना जानते हैं? : धीरेश सैनी
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मेरी दिलचस्पी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक सरकार (बांग्ला डायलेक्ट के लिहाज से मानिक सरकार) के बजाय उनकी पत्नी पांचाली भट्टाचार्य से म...
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