एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Friday, September 16, 2016
सीपीआईएम की आंखों पर हिंदुत्व का परदा?
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`लग्गी जे तेरे कालज़े हाल्ले छुरी नहीं एह ना समझ शहर दी हालत बुरी नहीं` ( सुरजीत पात्तर की पंक्तियां) `देश में अभी जो राजनीति...
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Friday, December 4, 2015
कूलर साहब का इंतज़ार : नदीम एफ़. पराचा
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अहमद परवेज़ की पेंटिंग क राची में हाल ही में तामीर हुए क्लिफ्टन फ़्लाइ-ओवर का अच्छा-ख़ासा हिस्सा सूफ़ी संत अब्दुल्ला शाह ग़ाज़ी की मज़ार से ...
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Monday, October 19, 2015
नफ़रत की संस्कृति का विरोध ज़िंदगी की पहचान है : लाल्टू
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देश भर में तकरीबन पचीस साहित्यकारों ने अपने अर्जित पुरस्कार लौटाते हुए मौजूदा हालात पर अपनी चिंता दिखलाई है। जब सबसे पहले हिंदी...
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Monday, October 12, 2015
एक बस अपील...लौटा दीजिए पुरस्कार : शिवप्रसाद जोशी
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साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने चाहिए. जिनके पास जिन जिन वक़्तों के पुरस्कार हैं. वे सब आगे आएं और अपने पुरस्कार लौटा दें. इस फेर...
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