एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Wednesday, June 20, 2018
मुक्तिबोध — उत्पीड़न और नायकत्व : असद ज़ैदी
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('नया पथ' का मुक्तिबोध विशेषांक मुझे बहुत देरी से हासिल हो पाया। इस पत्रिका में छपा असद जी का यह लेख मुक्तिबोध के उत्पीड़न और हि...
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Monday, May 14, 2018
बेटे के नाम चिट्ठी -चार्ल्स मंगोशी
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Charles Mungoshi चार्ल्स मंगोशी की कविता ।।बेटे के नाम चिट्ठी।। अब कद्दू पक गए हैं. साल की पहली मकई की फसल से हम कुछ ही ...
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Saturday, May 5, 2018
नामवरी में कोई कमी नहीं - धीरेश सैनी
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प्राइम टाइम में नामवर रवीश कुमार की वजह से एनडीटीवी इंडिया कई मामलों में अनूठा है। 4 मई 2018, शुक्रवार रात के प्राइम टाइम में हिं...
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