एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Saturday, March 2, 2019
गाली और बुद्धिजीवी : अमोल सरोज
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(देशभक्ति के नाम पर `संस्कारी टोले` सड़कों पर `दुश्मन` की माँ-बहन की गालियां निकालते हुए घूम रहे थे। हर प्रतिरोधी विचार को बल्कि...
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Friday, January 25, 2019
कृष्णा सोबती : चान्नण मीनार जो लफंगों का चैन छीनती है
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उस चान्नण मीनार कृष्णा सोबती के होने से हिंदी साहित्य के लफंगे, लम्पट, छिपे और खुले दक्षिणपंथी, फासिस्टों के चम्पू ख़ुद को कितना विचलित औ...
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Saturday, December 22, 2018
मेघालय: मुख्यधारा की राजनीति, खनन माफिया और उजड़ता जनजातीय जीवन
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Photo: Tarun Bhartiya इस साल फरवरी में मेघालय विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की आशंका की खबरें छपी थीं कि चुनाव में खनन माफ...
Thursday, November 15, 2018
टीएम कृष्णाः एक रचनाकार की तड़प और उसका संघर्ष - शिवप्रसाद जोशी
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“ मैं सोचता हूं कि मुझे संगीत पसंद है क्योंकि इसका नैतिकता से बहुत थोड़ा सा लेनादेना है. बाकी हर चीज़ नैतिक या अनैतिक है और मैं ऐसी...
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Thursday, October 25, 2018
विष्णु खरे—स्मरण : असद ज़ैदी
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पंद्रह नवम्बर २०१७ की शाम दिमाग़ में नक़्श है। लोदी रोड श्मशान में कुँवर नारायण के अंतिम संस्कार के वक़्त अचानक दो लोगों पर नज़र पड़ी−−...
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Thursday, September 20, 2018
विष्णु खरे - अपनी तरह के अलहदा
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कवि पंकज चतुर्वेदी ने विष्णु खरे की रामचंद्र शुक्ल और मुक्तिबोध को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी का ज़िक्र किया तो किसी ने इस वक़्त ऐसा न करने...
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Wednesday, June 20, 2018
मुक्तिबोध — उत्पीड़न और नायकत्व : असद ज़ैदी
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('नया पथ' का मुक्तिबोध विशेषांक मुझे बहुत देरी से हासिल हो पाया। इस पत्रिका में छपा असद जी का यह लेख मुक्तिबोध के उत्पीड़न और हि...
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