एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Sunday, September 27, 2020
आलोचना की आलोचना : फ़ासीवाद सम्बंधी अंक पर कृष्ण मोहन की समीक्षा
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पिछले दिनों नामवर सिंह पर हिन्दी के ` विद्वानों ` के ताबड़तोड़ लाइव कार्यक्रमों के दौरान किसी ने उनके संपादन में ` आलोचना ` का पुनर्प्रकाश...
Thursday, August 13, 2020
अमर शायरों की सफ़ में है राहत इंदौरी की जगह -धीरेश सैनी
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अपनी विद्वता के `आइवरी टावर्स` में बैठे कवि-बुद्धिजीवी जो भी समझें, पर सच यही है, इत्ते बड़े मुल्क में, एक सीधी सी बात को ऐसे खरेपन से कह ...
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Sunday, August 9, 2020
रैना महाराज के हाथों प्रेमचंद का शुद्धिकरण!
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प्रेमचंद की एक बड़ी मज़े की कहानी है, 'बड़े भाई साहब'। थियेटर वालों को भी यह काफ़ी पसंद रही है। दो अभिनेताओं के द्वारा बिना किसी तामझाम ...
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Sunday, August 2, 2020
अपने विद्वेषी पूर्वजों के मोह में धूर्तता कर रहे हैं अपूर्वानंद?
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पिछली पोस्ट से आगे अपूर्वानंद से बात कर रहे युवकों ने एक सीधे सवाल के जवाब में ` कलाकार के अपने भीतर रहने ` जैसी तमाम बातें झेलने के बा...
अपू्र्वानंद की नई उपलब्धि : वाम के मंच से वाम पर हमला
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भारत में वाम और उसकी सांस्कृतिक इकाइयां क्या बौद्धिक रूप से इतनी दरिद्र हो चुकी हैं कि वे लेनिन के विरुद्ध घृणा भरे अभियान चलाकर राजसत्ता...
Saturday, August 1, 2020
लेनिन और हिन्दी पट्टी के अपूर्वानन्द जैसे गुबरैले बुद्धिजीवी : -धीरेश सैनी
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सीपीआई से यात्रा शुरू कर चोरी वगैराह विवादों से और कांग्रेस-वांग्रेस से होकर मोटिवेटर टाइप करियर तक पहुँच जाने वाले हिन्दी के सवर्ण बुद्धि...
Wednesday, April 22, 2020
रामचंद्र शुक्ल विवाद: क्योंकि आप मनुष्य होना नहीं चाहते
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बा ख़ुदा दीवाना बाशद बा मुहम्मद होशियार अपने पिता या किसी पुराने अध्यापक से फ़ारसी की यह मशहूर और दिलचस्प कहावत बहुत से लोगों ने सुन...
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