एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Wednesday, November 3, 2021
पता नहीं चलता कि कब किस ने पाला बदल लिया है
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प्रिय कवि लाल्टू का नया कविता संग्रह `कौन देखता है कौन दिखता` परिकल्पना प्रकाशन से छप कर आया है। इस संग्रह से कुछ कविताएँ यहाँ देते वक़्त इ...
Friday, October 1, 2021
शिवप्रसाद जोशी की किताब `रिक्त स्थान और अन्य कविताएँ`
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शिवप्रसाद जोशी 1991 से कविताएँ लिख रहे हैं। 1947 के बँटवारे और व्यापक साम्प्रदायिक हिंसा के बाद गाँधी का क़त्ल कर अपनी ताक़त और मंशा का प्...
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