एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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अरुंधति रॉय
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अरुंधति रॉय
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Friday, July 7, 2017
अरुंधति के `द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैपीनेस` पर शिवप्रसाद जोशी
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अन्यतम ख़ुशी के अन्यतम संघर्ष की दास्तान अरुंधति रॉय का नया उपन्यास: द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैपीनेस (मर गई बुलबुल कफ़...
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Monday, July 3, 2017
ये रही मैं, तुम्हारे सामने, तुमसे मुकाबला करने के लिए : अरुंधति रॉय
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Photo by TARUN BHARTIYA तीन विभिन्न अंग्रेजी साक्षात्कारों से ली गईं चुनिंदा टिप्पणियां रूपांतर : शिवप्रसाद जोशी ...
Sunday, July 2, 2017
गैर राजनीतिक उपन्यास एक मिथक है : अरुंधति रॉय
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तीन विभिन्न अंग्रेजी साक्षात्कारों से ली गईं चुनिंदा टिप्पणियां - 1 रूपांतर : शिवप्रसाद जोशी -गैर राजनीतिक उपन्यास नहीं लिखा...
Saturday, April 30, 2011
'क्रांति' का जंतर मंतर : अरुंधति रॉय
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अण्णा हज़ारे के आह्वान पर हज़ारों लोग जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए थे। बीस साल पहले जब उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण का दौर हम पर थोपा गया तब हम...
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