एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Showing posts with label
अशोक वाजपेयी
.
Show all posts
Showing posts with label
अशोक वाजपेयी
.
Show all posts
Friday, September 18, 2026
अशोक वाजपेयी को संस्कृति का मसीहा कोई मूर्ख ही कहेगा - भैरव प्रसाद गुप्त
›
भैरव प्रसाद गुप्त (वर्तमान साहित्य, अगस्त-90) (सुप्रसिद्ध कथाकार भैरव प्रसाद गुप्त से विद्याधर शुक्ल की बातचीत) भोपाल का भारत भवन अपने जन्म ...
Saturday, October 12, 2019
कविता के अनुर्वर प्रदेश की ज़रख़ेज़ ज़मीन
›
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार समारोह में शुभम श्री आई नहीं थीं। अच्युतानंद मिश्र पहले ही कविता पढ़ चुके होंगे। अदनान कफ़ील दरवेश पढ़ रहे थे। उनकी...
›
Home
View web version