एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Thursday, May 21, 2026
`किसी अनजान ढाणी` से एक खरी-बेचैन आवाज़
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`बौने प्रहसन और अन्य कविताएं` कविता संग्रह प्रकाशक - न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ``एक आवाज़ आई ये देश महान है मैंने ग़ौर से देखा तो सदियों से रक्त...
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Sunday, May 15, 2022
एक सुबुक आवाज़ की फैलती स्याही
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(अदनान कफ़ील दरवेश की कविताओं पर कुछ बातें) शिवप्रसाद जोशी XV We, the mortals, touch the metals, the wind, the ocean shores, the ...
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