एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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कुमार अम्बुज
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कुमार अम्बुज
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Friday, September 7, 2012
साहित्य विवेक ही जीवन विवेक है - कुमार अम्बुज
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करीब दो बरस पहले यह टिप्पणी लिखी गई थी। एक स्थानीय आयोजन से प्रेरित। बहरहाल। एक-दो वाक्यों में संपादन के साथ यह यहॉं है। साहित्यि...
Sunday, January 22, 2012
कुमार अम्बुज की एक कविता
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कुमार अम्बुज की यह कविता 2009 में उनके ब्लॉग पर पढ़ी थी। मेरी यह अत्यंत प्रिय कविता और इस कविता के बाद में उनकी टिपण्णी वहीं से साभार है...
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