एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Wednesday, January 28, 2009
घेरेबंदी...इस बार पूरी कविता
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इससे पहले इस कविता का एक अंश पोस्ट किया था। अब ये पूरी कविता आपके सामने है, कविता लंबी है, लेकिन एक बार पढ़ना शुरू करें तो फिर अंत पर ही स...
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