एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

Showing posts with label जलेस. Show all posts
Showing posts with label जलेस. Show all posts
Monday, March 3, 2014

नवउदारवाद और सांप्रदायिक फ़ासीवाद का उभार : प्रभात पटनायक

›
जलेस के इलाहाबाद में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन के साझा संस्कृति संगम में प्रभात के आलेख का सम्पूर्ण पाठ जनतंत्र की वैधता के लिए अवाम के ब...
Saturday, March 1, 2014

जलेस सम्मेलन में साझा संस्कृति संगम की घोषणा

›
नयी साहसिक पहलक़दमी की जरूरत जनवादी लेखक संघ के इलाहाबाद में हुए राष्ट्रीय सम्मलेन के अवसर पर आयोजित साझा संस्कृति संगम (14 फरवरी, 2014...
›
Home
View web version

About Me

My photo
Ek ziddi dhun
धीरेश सैनी Dhiresh Saini
View my complete profile
Powered by Blogger.