एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Wednesday, October 3, 2012
अस्मिता के आंदोलनों के द्वंद्व -शिवप्रसाद जोशी
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`समयांतर` में छपे लेख ` हिमालयः बसेगा तो बचेगा ` के संबंध में राय मांगने पर शिवप्रसाद जोशी ने ब्लॉग के लिए यह लेख मेल से भेजा था। मै...
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Monday, July 23, 2012
पहाड़ों का विनाश और लीलाधर बुद्धिजीवियों की जुगाड़ी कलाबाजी
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समाचार-संदर्भ : हिमालयः बसेगा तो बचेगा Author: चारु तिवारी (समयांतर) Edition : July 2012 उत्तराखंड के पहाड़ों से इन दिनों खतरन...
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