एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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प्रणय कृष्ण
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प्रणय कृष्ण
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Tuesday, November 9, 2010
अरुंधती और देश - प्रणय कृष्ण
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अरुंधती राय का किसी देश के बौद्धिक क्षितिज पर सक्रिय होना इस बात का आश्वासन है कि उस देश की सत्ता और संपत्ति पर वंचितों की दावेदारी की ल...
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Monday, August 2, 2010
विभूति के बयान पर जसम
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जन संस्कृति मंच पिछले दिनों म. गा हिं. वि. वि. के कुलपति श्री विभूति राय द्वारा एक साक्षात्कार के दौरान हिंदी रत्री लेखन और लेखिकाओं के बार...
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Thursday, November 19, 2009
नक्सलबाड़ी विद्रोह का सांस्कृतिक पक्ष : प्रणय कृष्ण
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नक्सलबाड़ी किसान विद्रोह (१९६७) ने भारत की एक नई कल्पना का सृजन किया जिसने कला, संस्कॄति और साहित्य पर गहरा अखिल भारतीय असर डाला. किसी आंदोलन...
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Sunday, August 30, 2009
साहित्य, सत्ता और सम्मान : प्रणय कृष्ण
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जनांदोलनों और मानवाधिकारों पर क्रूर दमन ढानेवाली छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा १० व ११ जुलाई को प्रायोजित 'प्रमोद वर्मा स्मृति सम्मान" कार...
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