एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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भगत सिंह
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Saturday, September 26, 2009
हवा में रहेगी ख़यालों की बिजली...
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दरजे पांच की हिन्दी की किताब में भगत सिंह पर एक पाठ (सबक यानी लेसन) था। इसकी शुरुआत भगत सिंह के उस ख़त की काव्यपंक्तियों के अनुवाद से होती थ...
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