एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Monday, October 12, 2015
एक बस अपील...लौटा दीजिए पुरस्कार : शिवप्रसाद जोशी
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साहित्य अकादमी के पुरस्कार लौटाने चाहिए. जिनके पास जिन जिन वक़्तों के पुरस्कार हैं. वे सब आगे आएं और अपने पुरस्कार लौटा दें. इस फेर...
Saturday, December 29, 2012
बलात्कार की संस्कृति और राजसत्ता
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नई दिल्ली। बलात्कार की संस्कृति के खिलाफ व्यापक सांस्कृतिक और राजनीतिक आंदोलन चलाने की जरूरत है। दिल्ली की सड़कों पर उमड़े जनविरोध न...
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Saturday, December 22, 2012
राजेंद्र यादव के साथ बदसलूकी की निंदा
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वरिष्ठ लेखक राजेंद्र यादव के साथ बदसलूकी के विरोध में लेखकों का यह वक्तव्य आज (22-12-2012)जनसत्ता में छपा है। विभिन्न माध्यमों से पता चल...
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