एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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लोग ही चुनेंगे रंग
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Thursday, February 18, 2010
लाल्टू की चार कविताएँ उनके नये संग्रह से
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मिडिल स्कूल ऊँची छत नीचे झुके सत्तर सिर तीस बाई तीस के कमरे में शहतीरें अँग्रेज़ी ज़माने की कुछ सालों में टूट गिरेंगीं सालों लिखे खत सरकारी ...
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