एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Wednesday, October 30, 2013
विचारधारा ही ज़बान और बयान को तय करती है - असद ज़ैदी
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`प्रभात खबर` अख़बार में छपा वरिष्ठ कवि असद ज़ैदी का इंटरव्यू ‘कविता’ आपके लिए क्या है? कविता समाज में एक आदमी के बात करने का तरीक़ा ...
Friday, September 7, 2012
साहित्य विवेक ही जीवन विवेक है - कुमार अम्बुज
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करीब दो बरस पहले यह टिप्पणी लिखी गई थी। एक स्थानीय आयोजन से प्रेरित। बहरहाल। एक-दो वाक्यों में संपादन के साथ यह यहॉं है। साहित्यि...
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