एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

Showing posts with label विहाग वैभव. Show all posts
Showing posts with label विहाग वैभव. Show all posts
Wednesday, April 22, 2020

रामचंद्र शुक्ल विवाद: क्योंकि आप मनुष्य होना नहीं चाहते

›
बा ख़ुदा दीवाना बाशद बा मुहम्मद होशियार अपने पिता या किसी पुराने अध्यापक से फ़ारसी की यह मशहूर और दिलचस्प कहावत बहुत से लोगों ने सुन...
3 comments:
Saturday, October 12, 2019

कविता के अनुर्वर प्रदेश की ज़रख़ेज़ ज़मीन

›
भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार समारोह में शुभम श्री आई नहीं थीं। अच्युतानंद मिश्र पहले ही कविता पढ़ चुके होंगे। अदनान कफ़ील दरवेश पढ़ रहे थे। उनकी...
›
Home
View web version

About Me

My photo
Ek ziddi dhun
धीरेश सैनी Dhiresh Saini
View my complete profile
Powered by Blogger.