एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

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Friday, June 5, 2026

मोहन मुक्त की कविताएँ

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कवि मोहन मुक्त मेरा पहाड़ ????? मुंडा कोल गोंड नाग बौद्ध द्रविड़ या हडप्पन बाद के जो कोई भी थे मेरे पुरखे उन्होंने कभी नहीं कहा ....'मेरा ...
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Wednesday, September 14, 2022

यहाँ मेरा घर बन रहा है (मोहन मुक्त के कविता संग्रहः “हिमालय दलित है” पर कुछ नोट्स) : शिवप्रसाद जोशी

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वो तुम थे एक साधारण मनुष्य को सताने वाले अपने अपराध पर हँसे ठठाकर, और अपने आसपास जमा रखा मूर्खों का झुंड अच्छाई को बुराई से मिलाने के लिए...
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Ek ziddi dhun
धीरेश सैनी Dhiresh Saini
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