एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Laltu
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Sunday, July 12, 2026
मनुष्य और समाज की बेहतरी का ज्ञान-विज्ञान - शिवप्रसाद जोशी
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(विज्ञान में विचार के नये आयाम) समीक्षा पुस्तकः ज्ञान, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और समाजः आम ज़बान में कुछ बातें लेखकः लाल्टू प्रकाशकः एकलव्य मूल...
Wednesday, November 3, 2021
पता नहीं चलता कि कब किस ने पाला बदल लिया है
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प्रिय कवि लाल्टू का नया कविता संग्रह `कौन देखता है कौन दिखता` परिकल्पना प्रकाशन से छप कर आया है। इस संग्रह से कुछ कविताएँ यहाँ देते वक़्त इ...
Monday, October 19, 2015
नफ़रत की संस्कृति का विरोध ज़िंदगी की पहचान है : लाल्टू
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देश भर में तकरीबन पचीस साहित्यकारों ने अपने अर्जित पुरस्कार लौटाते हुए मौजूदा हालात पर अपनी चिंता दिखलाई है। जब सबसे पहले हिंदी...
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Wednesday, January 14, 2015
पिथागोरस का प्रमेय - सब्ब बेद में बा : आशीष लाहिड़ी
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( बांग्ला अखबार ' एई समय ' में प्रकाशित आशीष लाहिड़ी के लेख का वरिष्ठ कवि व वैज्ञानिक लाल्टू का किया अनुवाद। आशीष लाहिड़ी नैशनल ...
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