एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Lanat Ka Pyala
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Saturday, January 17, 2026
शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़ खुलता कवि
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अदनान कफ़ील दरवेश की कविता पर शिवप्रसाद जोशी अदनान , शाम के पृष्ठ पर एक असम्भव की तरफ़ खुलता है - उसकी यह काव्य-पंक्ति उसका परिचय है। अप...
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