एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Prasanta Chakravarti
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Monday, June 8, 2026
क्या अपमान से निपटने के लिए उग्रता के अलावा कोई रास्ता है?
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समीक्षा निबंध: प्रसांता चक्रवर्ती रॉक्सेन एल. यूबेन. ड्रिवेन टु देयर नीज़: ह्यूमिलिएशन इन कॉन्टेंपोरेरी पॉलिटिक्स. (प्रिंसटन और ऑक्सफ़र्...
Friday, February 24, 2017
प्रतिरोध की नई संवेदना से जुड़िए : शिवप्रसाद जोशी
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प्रशांत ने अस्पताल से लौटकर युवाओं का आह्वान करते हुए कमोबेश यही कहा , देवी ने भी कुछ यही कहा एक ईमेल में कि “ मैं स्थिर हूं , ऊर्जा से भर...
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