एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Premchand
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Sunday, August 2, 2020
अपने विद्वेषी पूर्वजों के मोह में धूर्तता कर रहे हैं अपूर्वानंद?
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पिछली पोस्ट से आगे अपूर्वानंद से बात कर रहे युवकों ने एक सीधे सवाल के जवाब में ` कलाकार के अपने भीतर रहने ` जैसी तमाम बातें झेलने के बा...
अपू्र्वानंद की नई उपलब्धि : वाम के मंच से वाम पर हमला
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भारत में वाम और उसकी सांस्कृतिक इकाइयां क्या बौद्धिक रूप से इतनी दरिद्र हो चुकी हैं कि वे लेनिन के विरुद्ध घृणा भरे अभियान चलाकर राजसत्ता...
Monday, July 31, 2017
हिन्दी नवजागरण में प्रेमचंद : मनमोहन
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भारतीय नवजागरण और राष्ट्रीय स्वाधीनता संघर्ष की श्रेष्ठतम उपलब्धियों में एक प्रेमचंद भी हैं। आज़ादी के बाद बहुत से अवांगर्द कहते थे ...
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