एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Shubha
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Saturday, September 6, 2014
शुभा की चार कविताएं
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वरिष्ठ कवयित्री, लेखिका और एक्टिविस्ट शुभा का आज जन्मदिन है। इस मौके पर हम अपनी 60 साल की इस युवा साथी की चार कविताएं प्रकाशित कर रहे है...
Monday, January 21, 2013
शमशेर : कुछ निजी नोट्स - शुभा (अंतिम किस्त)
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(पिछली दो कड़ियों से जारी) शमशेर की कविता में गहरी आत्मीयता है। इस आत्मीयता के कारण उनके यहां प्रेम के अछूते चित्र और उमंग भरी कल्पना ...
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Thursday, January 17, 2013
शमशेर : कुछ निजी नोट्स - शुभा (दूसरी किस्त)
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(पिछली पोस्ट से जारी) 2 शमशेर अपने ढंग के मार्क्सवादी हैं। वे धर्म को बाई-पास नहीं करते। ख़ास तौर से इसलिए कि साम्प्रदायिक दंगे, ...
Monday, January 14, 2013
शमशेरः कुछ निजी नोट्स - शुभा
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शमशेर के बारे में हिंदी जगत में जैसे एक रूढ़ि बन गई है कि वे बड़े मुश्किल कवि हैं या वे रूपवादी हैं या वे मार्क्सवादी हैं, या वे प्रयोगव...
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