एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Thursday, November 19, 2009
नक्सलबाड़ी विद्रोह का सांस्कृतिक पक्ष : प्रणय कृष्ण
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नक्सलबाड़ी किसान विद्रोह (१९६७) ने भारत की एक नई कल्पना का सृजन किया जिसने कला, संस्कॄति और साहित्य पर गहरा अखिल भारतीय असर डाला. किसी आंदोलन...
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Friday, November 13, 2009
मुक्तिबोध के जन्मदिन पर उनके लिए एक कविता
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मनुष्य की परिभाषा ------------------------ यहाँ सामान बदला जाता है और एक ख़ास रिआयत के साथ पकने दी जाती है कविता वैज्ञानिक अवसाद में चेतना स...
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Sunday, November 8, 2009
वीरेन डंगवाल के कविता संग्रह पर मधुसूदन आनंद
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`स्याही ताल` वीरेन डंगवाल का तीसरा कविता संग्रह है। इससे से पहले `इसी दुनिया में` (१९९१) और `दुश्चक्र में सृष्टा` (२००२) उनके दो कविता ...
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Thursday, November 5, 2009
इरोम शर्मिला के समर्थन में
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दमनकारी कानून सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम के खिलाफ मणिपुर की विख्यात कवयित्री इरोम शर्मिला की ऐतिहासिक भूखहडताल के १० साल होने पर ` राज...
Monday, November 2, 2009
कार्तिक-स्नान : मनमोहन
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एक ही दिन एक ही मुहूर्त में हत्यारे स्नान करते हैं हज़ारों-हज़ार हत्यारे सरयू में, यमुना में गंगा में क्षिप्रा, नर्मदा और साबरमती में पवित्र ...
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Tuesday, October 6, 2009
चिदम्बरम जैसे लोग सोफेसटिकेटेड माफिया हैं और बुद्धिजीवी खामोश हैं : आनंदस्वरूप वर्मा
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सत्ता का दमनकारी चरित्र लगातार तीखा हो रहा है लेकिन खासकर हिन्दी पट्टी में `कोई फर्क नहीं पड़ता` जैसी स्थिति है। एकदम सन्निपात की स्थिति क्यो...
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Friday, October 2, 2009
एक परिंदा उड़ता है
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अपने प्यारे कवि मनमोहन के जन्मदिन पर उनकी यह कविता- एक परिंदा उड़ता है ------------- एक परिंदा उड़ता है मुझसे पूछे बिना मुझे बताये बिना उड़त...
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