एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

Sunday, February 28, 2010

हुसैन की कूची से होली के रंग

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होली मुबारक दोस्तो
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Thursday, February 25, 2010

हम शर्मिंदा हैं हुसैन

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अखबार अभी कुछ देर पहले शाम को उठाया और सन्न रह गया. `द हिन्दू` की बोटम स्टोरी `M.F. Husain gets Qatar nationality` आपने तो सुबह ही देख ली...
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Wednesday, February 24, 2010

विष्णु नागर के नये संग्रह से चार कविताएँ

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दो यात्राएँ ------ मैं एक यात्रा में एक और यात्रा करता हूँ एक जगह से एक और जगह पहुँच जाता हूँ कुछ और लोगों से मिलकर कुछ और लोगों से मिलने चल...
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Monday, February 22, 2010

सच्ची रचनात्मक ख़ुशी बड़ी नेमत है : मनमोहन

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एक लिखने वाले को असल इनाम ज़्यादातर अपने लिखने के अंदर ही उसे मिल जाया करता है। एक सच्ची रचनात्मक ख़ुशी, चाहे वह किसी तकलीफ में लिपटी क्यों...
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Thursday, February 18, 2010

लाल्टू की चार कविताएँ उनके नये संग्रह से

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मिडिल स्कूल ऊँची छत नीचे झुके सत्तर सिर तीस बाई तीस के कमरे में शहतीरें अँग्रेज़ी ज़माने की कुछ सालों में टूट गिरेंगीं सालों लिखे खत सरकारी ...
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Friday, February 12, 2010

प्रतिरोध का सिनेमा

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फोटो 1- दास्तानगोई प्रस्तुत करते राणा प्रताप और उस्मान शेख फोटो 2- गोरखपुर फ़िल्म फ़ेस्टिवल में सईद मिर्ज़ा चार दिनों तक चलने वाला पांचवां गोरख...
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Tuesday, February 9, 2010

ठेठ जीवन के उच्छलित स्त्रोतों के समीप \शिरीष कुमार मौर्य की कविता पर पंकज चतुर्वेदी

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शिरीष कुमार मौर्य ने बहुत धीरज, गम्भीरता, संयम और निष्ठा से ऐसी कविता सम्भव की है, जिसमें जीवन-द्रव्य की सान्द्रता है और आत्मतत्व की उदात्तत...
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धीरेश सैनी Dhiresh Saini
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