एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Saturday, January 8, 2011
फ़ैज़ पर कुछ नोट्स : असद ज़ैदी
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इज़हारे-अक़ीदत और वक़्त की कैफ़ियत 1941 में प्रकाशित अपने पहले संकलन का नाम फ़ैज़ ने 'नक्शे फ़रियादी' रखा. ये 'दीवाने ग़ालि...
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Tuesday, December 28, 2010
मैं यानी हम
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शिवप्रसाद जोशी 21वीं सदी के पहले दस साल पूरे हो गए हैं और एक अभूतपूर्व विकास दर की कुलांचे भरते देश में दुश्चिंता का न जाने ये साया ...
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Monday, December 6, 2010
मलबा -सुदीप बनर्जी
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समतल नहीं होगा कयामत तक पूरे मुल्क की छाती पर फैला मलबा ऊबड़-खाबड़ ही रह जाएगा यह प्रसंग इबादतगाह की आख़िरी अज़ान विक्षिप्त अनंत तक पुका...
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Thursday, December 2, 2010
रोज़ा पार्क्स जिसने अपनी सीट से उठने से मना कर दिया था
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एक दिन एक औरत ने कहा कि मैं भेदभाव नहीं मानूँगी और उसने उस सीट से उठने से मना कर दिया , जो नस्लवादी नियमों के अनुसार उसके लिए नहीं थी। आज य...
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Tuesday, November 30, 2010
संस्कृति का जनपक्ष : दूसरी और अंतिम किस्त
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( पिछली कड़ी से जारी) हमने अपनी लोक-प्रज्ञा की उपेक्षा की है, उस पारंपरिक ज्ञान के भण्डार की भी उपेक्षा की है जो पंचायत प्रशासन का आधार थी....
Wednesday, November 24, 2010
संस्कृति का जनपक्ष : हबीब तनवीर
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(उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 'क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सन्दर्भों में भारत की जीवन शक्ति' मे...
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Friday, November 19, 2010
जसम का बारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन
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लूट और दमन की संस्कृति के खिलाफ सृजन और संघर्ष को समर्पित जसम का बारहवां राष्ट्रीय सम्मेलन 13-14 नवंबर को दुर्ग (छत्तीसगढ़) में सफलतापूर्वक ...
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