एक ज़िद्दी धुन

जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद

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Sunday, May 24, 2009

आबिद आलमी की गज़ल

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जब य` मालूम है कि बस्ती की हवा ठीक नहीं फिर अभी इसको बदल लेने में क्या ठीक नहीं मेरे अहबाब की आँखों में चमक दौड़ गई हँस के जब मैंने कहा हाल ...
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Saturday, November 8, 2008

आबिद आलमी की दो गज़लें

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आबिद आलमी यानी रामनाथ चसवाल. ४ जून १९३३ को रावलपिंडी की गूज़रखान तहसील के ददवाल गाँव में पैदा हुए और १९४७ में हरियाणा (तब पंजाब का ही हिस्सा...
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धीरेश सैनी Dhiresh Saini
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