एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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छह दिसंबर
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Saturday, December 5, 2009
छह दिसंबर
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मलबा ----- समतल नहीं होगा कयामत तक पूरे मुल्क की छाती पर फैला मलबा ऊबड़-खाबड़ ही रह जाएगा यह प्रसंग इबादतगाह की आख़िरी अज़ान विक्षिप्त अनंत ...
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