एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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नारायण सुर्वे
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नारायण सुर्वे
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Wednesday, August 18, 2010
तब इतना करना!
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जब मैं न रहूँ इस अस्तित्व शून्यता में तब इतना करना बेहिचक तुम पोंछ लेना अपनी आँखें ठीक ही है, चार दिन- धड़केगा कलेजा, दम घुटने लग...
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