
जब मैं न रहूँ इस अस्तित्व शून्यता में
तब इतना करना
बेहिचक तुम पोंछ लेना अपनी आँखें
ठीक ही है, चार दिन-
धड़केगा कलेजा, दम घुटने लगेगा.
सँभाल लेना भर भर आती हिचकियों को,
रुन्धने न देना गले को.
फिजूल ही घावों की पीड़ा के चक्कर में न पड़ना
ख़ुशी से, ख़ुशी से बसा लेना एक आशियाँ जो तुम्हें रुचे
मुझे याद करके,
और ज़रूरत पड़े तो मुझे भुलाके.
-नारायण सुर्वे
मराठी से अनुवाद: भारतभूषण तिवारी
(जनकवि नारायण सुर्वे का लम्बी बीमारी के बाद सोमवार, १६ अगस्त को ठाणे में निधन हो गया.चिंचपोकली महानगर पालिका की इमारत में स्थित नारायण सुर्वे के सरकारी क्वार्टर की तस्वीर मराठी समाचारपत्र सकाळ की वेबसाइट से साभार)