एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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प्रभाष जोशी
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प्रभाष जोशी
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Wednesday, August 19, 2009
प्रभाष जोशी! शर्म तुमको मगर नहीं आती
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बड़ा हल्ला रहता आया है कि प्रभाष जोशी पत्रकारिता के शीर्ष पुरुष हैं. उनके शीर्ष पुरुषवादी विचार हमेशा ही सामने आते रहे हैं, यह बात अलग है कि...
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Wednesday, July 23, 2008
`दिमाग में भूसा और हाथ में काठ की तलवार`
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हमारे बेहद पिछडे समाज में अरसे पहले राधामोहन गोकुल, भगत सिंह, राहुल आदि नेताओं, बुद्धिजीवियों ने कट्टरताओं, अंधविश्वासों, लीचड़ मान्यताओं, स...
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