एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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रैदास
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Saturday, January 30, 2010
छोट बड़ो सब सम बसैं, हो रैदास प्रसन्न
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जात पात के फेर में, उरझत हैं सब लोग! मानवता को खात है, रैदास जात का रोग!! ..... जात पात में जात है, ज्यों केलन में पात रैदास न माणुस जुड़...
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