एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Arundhati Roy
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Friday, July 7, 2017
अरुंधति के `द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैपीनेस` पर शिवप्रसाद जोशी
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अन्यतम ख़ुशी के अन्यतम संघर्ष की दास्तान अरुंधति रॉय का नया उपन्यास: द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैपीनेस (मर गई बुलबुल कफ़...
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Monday, July 3, 2017
ये रही मैं, तुम्हारे सामने, तुमसे मुकाबला करने के लिए : अरुंधति रॉय
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Photo by TARUN BHARTIYA तीन विभिन्न अंग्रेजी साक्षात्कारों से ली गईं चुनिंदा टिप्पणियां रूपांतर : शिवप्रसाद जोशी ...
Sunday, July 2, 2017
गैर राजनीतिक उपन्यास एक मिथक है : अरुंधति रॉय
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तीन विभिन्न अंग्रेजी साक्षात्कारों से ली गईं चुनिंदा टिप्पणियां - 1 रूपांतर : शिवप्रसाद जोशी -गैर राजनीतिक उपन्यास नहीं लिखा...
Thursday, January 5, 2017
जॉन बर्जरः वक़्त को टटोलती निगाह - शिवप्रसाद जोशी
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John Berger ( 5 November 1926 – 2 January 2017 ) अरुंधति रॉय 2009 के दरम्यान जॉन बर्जर से मिलने गई थीं. बर्जर ने बस उनसे पूछा कि तुम अ...
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Thursday, February 13, 2014
पेंगुइन को अरुंधति की फटकार
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अमेरिकी लेखक वेंडी डॉनिगर की `द हिन्दू: एन ऑलटरनेटिव हिस्ट्री` को पेंगुइन ने एक अनजान से कट्टर हिंदू संगठन के दबाव में `भारत` के अप...
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