एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
Sunday, May 24, 2009
आबिद आलमी की गज़ल
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जब य` मालूम है कि बस्ती की हवा ठीक नहीं फिर अभी इसको बदल लेने में क्या ठीक नहीं मेरे अहबाब की आँखों में चमक दौड़ गई हँस के जब मैंने कहा हाल ...
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Monday, May 4, 2009
इक़बाल बानो - जुझारू स्त्री-स्वर : असद ज़ैदी
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एक लम्बी बीमारी के बाद इक़बाल बानो (1935-2009) पिछली 21 अप्रैल को चल बसीं. लाहौर के इत्तेफ़ाक़ अस्पताल में दोपहर बाद उन्होंने आख़िरी साँस ली...
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Friday, May 1, 2009
मई दिवस
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हैप्पी मे डे... इस एसएमएस से नींद खुली। सेम टू यू नुमा कोई उत्साह नहीं था बल्कि कुछ कोफ़्त सी ही थी। फिर तीसरे पहर तक ऐसे कई एसएमएस मिले और क...
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Saturday, April 11, 2009
विष्णु प्रभाकर नहीं रहे
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मैं अभी कुछ देर पहले मुज़फ़्फ़रनगर में एक साहित्यप्रेमी दोस्त की दूकान पर इस लालच से गया था कि कुछ पुराने दोस्त मिलेंगे. यहाँ खबर मिली कि `आवार...
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Friday, April 3, 2009
इक़बाल के राम
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लबरेज़ है शराबे-हक़ीक़त से जामे-हिन्द । सब फ़ल्सफ़ी हैं खित्ता-ए-मग़रिब के रामे हिन्द ।। ये हिन्दियों के फिक्रे-फ़लक उसका है असर, रिफ़अत में...
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Thursday, March 26, 2009
पर यह वही दुनिया है : असद ज़ैदी
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आज से तीस पैंतीस साल पहले के वक़्त को याद करते हुए लगता है कि वो कोई और ही दौर था. बार बार ध्यान बदलाव पर ही जाता है, निरंतरता पर नहीं. मन...
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Saturday, March 21, 2009
सांझ का जादू
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...और समंदर के हृदय में समा गया सूरज (Kochi beach)
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