Showing posts with label गंगूबाई हंगल. Show all posts
Showing posts with label गंगूबाई हंगल. Show all posts

Wednesday, July 22, 2009

गंगूबाई हंगल, 1913–2009


गंगूबाई हंगल २१ जुलाई की सुबह, अपने जीवन के ९७वें वर्ष में, चल बसीं. हमारे वक़्त में वह किराना घराने का सबसे रौशन चिराग़ थीं. बस अब उनके गुरुभाई भीमसेन जोशी बचे हैं, तो लगता है वो भी पूना के अपने घर में सुबह के चिराग़ की तरह बुझने-बुझने को हैं.

सवाई गन्धर्व की इस किस्मतवाली शिष्या ने अब्दुल करीम खां, भास्करराव बाखले, अल्लादिया खां, फैयाज़ खां को चलते फिरते देखा और गाते हुए सुना था. बड़ी बहन जैसी स्नेहिल आँखों से भीमसेन को एक आला गायक के मक़ाम तक पहुँचते हुए देखा था. जीवन में कभी उन्होंने अपने गायन की शुद्धता और अलंकारहीन सादगी को नहीं छोड़ा. उन्होंने बचपन और जवानी के आरंभिक दौर में घोर ग़रीबी, सामाजिक अपमान और भूख का सामना किया. किसी कार्यक्रम में उस्ताद अब्दुल करीम खां ने उनका गाना सुना, उनका हुलिया अच्छी तरह देखा, फिर पास बुलाकर उनके सर पर हाथ फेरकर बोले: "बेटी, खूब खाना और खूब गाना!" बालिका गंगूबाई सिमटी हुई सोच रही थी : गाना तो घर में खूब है, पर खाना कहाँ है!

कहने को मन होता कि यह एक युग का अंत है. पर यह श्रद्धांजलियों वाला "युगांत" नहीं है, बल्कि हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत और रंगमंच के सुतूनों के थोक विध्वंस का दौर है. एक महीने के अन्दर हबीब तनवीर, अली अकबर ख़ाँ, डी के पट्टमाल, गंगूबाई हंगल जाते रहे, अभी के पाँच सालों में फ़ीरोज़ दस्तूर, बिस्मिल्लाह ख़ाँ, विलायत ख़ाँ, एम एस सुब्बुलक्ष्मी और इसी पाये की अनेक प्रतिभाएं नहीं रहीं. पता नहीं सन २००९ के ख़त्म होते-होते कितनी और हस्तियाँ रुख़सत हो जाएंगी. हिन्दुस्तान में शास्त्रीय संगीत और मंचीय कलाएं एक भयावह मीडियाक्रिटी, समझौतापरस्ती और बाज़ारूपन के दौर में दाखिल हो रही हैं और यह हमारा सौभाग्य है कि बीसवीं सदी के उत्तरार्ध की उन्नत ध्वन्यांकन टेक्नोलाजी की बदौलत हमारे पास कम से कम उस दौर के लोगों के गायन और वादन की रिकार्डिंग उपलब्ध रहेंगी.

हम इस महान दलित गायिका पर जल्दी ही एक विस्तृत पोस्ट लगाने की कोशिश करेंगे.

(यह टिपण्णी श्री असद ज़ैदी ने मेल की थी. मैंने अपने किसी दोस्त को फ़ोन के जरिये ईमेल आईडी बताकर इसे पोस्ट कराया.चूंकि असद जी ने अपने नाम का ज़िक्र नहीं किया, इसलिए पोस्ट में यह जानकारी देर से दी जा पा रही है.)