एक ज़िद्दी धुन
जी को लगती है तेरी बात खरी है शायद / वही शमशेर मुज़फ़्फ़रनगरी है शायद
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Saturday, March 6, 2010
ईश्वर लीला
(हरिभूमि अखबार की कतरन)
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