Saturday, April 12, 2008

नेपाल में सुर्ख सवेरा



यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से खल्क
न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई
यूँ ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग में फूल
न उनकी हार नई है, न अपनी जीत नई
(फैज़)

3 comments:

Akinol said...

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Arun Aditya said...

यूँ ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग में फूल
badhaaai.

परेश टोकेकर कबीरा said...

नेपाल की क्रांतिकारी जनता को लाल सलाम। फैंज भले ही पाकिस्तान में वो न कर पाये जो आज नेपाल में हो रहा है लेकिन
"न उनकी हार नई है, न अपनी जीत नई"।
पाकिस्तान व हिन्दोस्ता में भी सुर्ख सवेरे की आस में ...