Monday, April 14, 2008

मनमोहन की एक अधूरी टिपण्णी (नवजागरण के नायक)

यह एक विलक्षण लेकिन बड़ा ही अर्थपूर्ण ऐतिहासिक संयोग है कि १२ अप्रैल को सफदर के जन्मदिन (नुक्कड़ नाटक दिवस) के साथ ११ अप्रैल को ज्योति बा फुले और १४ अप्रैल को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकरका भी जन्मदिन है। बीच में १३ अप्रैल को बैसाखी का दिन जलियांवाला बाग़ की याद दिलाता है। १३ अप्रैल हमारे इतिहास का ऐसा रक्तरंजित पन्ना है जिस पर हमारी आजादी की लड़ाई और साम्राज्यवाद की दिल दहला देने वाली दास्तान लिखी गई। इस घटना ने साम्राज्यवाद की न्रिशंस्ता और हृद्य्हीनता का नग्नतम रूप सामने ला दिया। जलियांवाला बाग़ का रक्तपात व्यर्थ नहीं गया। इसके बाद हिन्दुस्तान में क्रांतिकारी आन्दोलन की लौ रोशन हुई। आज़ादी की लड़ाई की लहर और ऊंची उठी। ऊधम संघ की शहादत अशफाकया उसके बाद अशफाक या या याबिस्मिल, अशफाक या उसके बाद भगत सिंह और उनके साथी युवाओं के बलिदानी संघर्ष के पीछे भी इस घटना की वेदना की अग्नि कहीं न कहीं मौजूद थी। गांधी के नेतृत्व में असहयोग आन्दोलन को जो अभूतपूर्व सफलता मिली, उसमें भी जलियांवाला बाग़ के खून का रंग मिला था।
ज्योति बा फुले दलित आन्दोलन के मसीहा हैं और भारतीय नवजागरण के अप्रतिम नायक हैं। ज्योति बा और उनके सत्यशोधक समाज ने बड़े ही बुनियादी ढंग से १९वीं शताब्दी में समाज-सुधार आन्दोलन के प्रश्नों को उठाया। ज्योति बा ने बताया कि हमारी आजादी का रास्ता हमारे सामाजिक रूपांतरण से होकर गुजरता है। धर्म और संस्कृति के नाम पर स्त्रियों और दलितों को पैर की जूती बनाकर शेखियां बघारने वाला समाज इस लायक नहीं कि वह आज़ादी की किसी लड़ाई को लड़ सके या भारतीय संस्कृति की छत्रछाया में पलने वाली इस उत्पीड़क गुलामगीरी और बेगारी का अंत होना चाहिए तभी साम्राज्यवादी गुलामी से आज़ादी का कोई अर्थ है।
ज्योति बा फुले और सावित्री बाई फुले ने यह भी बताया कि दलितों के प्रश्न महिलाओं के प्रश्न के साथ अभिन्न रूप से जुड़े हैं। सामाजिक बराबरी की कोई भी लड़ाई स्त्रियों की बराबरी की लड़ाई के बिना निरा ढोंग सिद्ध होगी। १९वीं सदी के समाज-सुधार आन्दोलन में जो चेतना ज्योति बा में दिखाई दी थी.....
(साथियो! मनमोहन की ये टिपण्णी अधूरी है. कई दिन पहले मैंने खासी दिक्कत में टाइप की थी. अब आगे टाइप करने के आसार फिलहाल नहीं. अधूरी चीजों में भी सार महसूस किया जा सकता है यही सोचकर इसे पेस्ट कर रहा हूँ. गर ठीक होता हूँ तो लौटकर फिर सिलसिला शुरू करने की कोशिश करूंगा)

5 comments:

अतुल said...

कोई बात नहीं. इतना भी काफ़ी जानकारी है. आने पर फ़िर लिखें.

वर्षा said...

yahi to aapki khas baat hai,baat adhuri chhod dete hain, lekin ye adhuri baat bhi poori se kam nahi thi, sehat sambhaliye.

Gardagami said...

See Please Here

aditi said...

laut bhi aayiye ji ab...kab tak beemari se dosti rakhiyega

परेश टोकेकर said...

धीरेश जी कैसे है आप? माफी चाहता हू कई दिनो से आपकी पोस्ट पढने का मौका ही नही मिला। आप शिघ्र लौटे व फिर वही सिलसिला शुरू करे, हमारी शुभकामनाये आपके साथ है।